हर कोई…

हर कोई
अपने
दुःखों में
तर मिलता है,

जब कोई
कंधा
तलाशता हूँ
तो
सर
मिलता है।

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4 responses to this post.

  1. भेंट के लिए हम आभारी हैं|
    काफी अच्छा लिख लेतें हैं आप, स्वप्नेश| आप यूँ हीं लिखतें रहे|

    प्रतिक्रिया

  2. har koi dukh se tar milta hai kandha dudo to sar milta hai baat to tab hai jab jab hum kisi ka kanda na dude kisi ka kanda ban kar to deke apna dukh kum ho jata hai.

    प्रतिक्रिया

  3. jis din apne sar ko ehmiyat doge kandhe bhi mil jaenge………

    प्रतिक्रिया

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